अंग्रेजों के जमाने का ​राजद्रोह खत्म, इसकी जगह अब नया क्या? नए कानून का ट्विस्ट समझिए

नई दिल्ली: अंग्रेजी हुकूमत के समय के राजद्रोह कानून पर काफी विवाद होता रहता था। उमर खालिद जैसे कई लोगों पर राजद्रोह कानून लगा तो विरोध जताया गया। JNU के छात्र रहे उमर खालिद पर विश्विद्यालय परिसर में देशविरोधी नारे के लिए राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था। यही कहा जा रहा था कि आजादी से पहले के इस कानून की अब जरूरत क्या है। गृह मंत्री अमित शाह ने कल लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता 2023 का प्रस्ताव रखा, उसमें एक बड़ा बदलाव सेक्शन 124A को खत्म करना भी है। हां, इसी कानून के तहत राजद्रोह लगता था और इसके काफी दुरुपयोग की शिकायतें आती रहती थीं। मौजूदा भारतीय दंड संहिता (IPC) में सिडिशन की व्याख्या भी ठीक तरह से नहीं है। जब भी इसके तहत ऐक्शन होता तो सरकार पर कानून के दुरुपयोग के आरोप लगते। ऐसे में आपके मन में सवाल होगा कि अगर यह कानून हटाया जा रहा है तो क्या इसकी जगह कोई नया कानून बनेगा? अगर हां तो उसमें क्या होगा। दरअसल सरकार ने औपनिवेशिक युग के राजद्रोह कानून को खत्म कर इसे नए स्वरूप में लाने का प्रस्ताव किया है। जी हां, ब्रिटिश काल के संदर्भ को समाप्त करते हुए नए कानून में राजद्रोह को नया शब्द दिया गया है ‘देशद्रोह’।

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